हंगामे के बीच राज्यपाल के अभिभाषण में झलका सरकार का विजन
विकास, सुशासन और जनकल्याण को बताया सरकार की प्राथमिकता
कांग्रेस ने वेल में लगाए सरकार विरोधी नारे
गैरसैंण: उत्तराखण्ड की पंचम विधानसभा के के प्रथम सत्र का शुभारंभ सोमवार को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह के अभिभाषण से हुआ।
अभिभाषण के दौरान मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने वेल में आकर जबरदस्त नारेबाजी कर विरोध जताया। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने अभिभाषण का बहिष्कार किया।
विधानसभा भवन में आयोजित सत्र में राज्यपाल ने प्रदेश सरकार की उपलब्धियों, नीतियों और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत करते हुए कहा कि सरकार प्रदेश को समृद्ध, सशक्त और विकसित राज्य बनाने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है।
राज्यपाल ने अपने अभिभाषण की शुरुआत उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास में आंदोलनकारियों, मातृशक्ति, युवाओं, किसानों, उद्यमियों तथा पूर्व सैनिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन्हीं की सहभागिता से देवभूमि उत्तराखण्ड निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

राज्यपाल ने कहा कि वर्ष 2025 में उत्तराखण्ड राज्य स्थापना की रजत जयंती पूरे प्रदेश में उत्साह और गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर नौ नवंबर को प्रधानमंत्री की उपस्थिति में राज्य की 25 वर्षों की विकास यात्रा और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। साथ ही राष्ट्रपति के संबोधन के साथ विधानसभा का विशेष सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें राज्य के विकास और भविष्य की दिशा पर व्यापक चर्चा हुई।
अभिभाषण में राज्यपाल ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश ने विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जनहित को केंद्र में रखकर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में ‘सरलीकरण, समाधान और निस्तारीकरण’ के सिद्धांतों पर आधारित प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

राज्यपाल ने कहा कि सरकार प्रदेश के समग्र विकास के लिए आर्थिक समृद्धि, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और आधारभूत ढांचे के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। महिलाओं के कल्याण और आत्मनिर्भरता के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनसे मातृशक्ति को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। कौशल विकास, उद्यमिता और स्टार्टअप को बढ़ावा देकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को आधुनिक बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं।

राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाने के लिए सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन क्षेत्रों में तेजी से काम किया जा रहा है। चारधाम यात्रा मार्गों के विकास, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और शिक्षा संस्थानों को सुदृढ़ करने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है और सरकार इसे और अधिक सशक्त बनाने के लिए नई योजनाएं लागू कर रही है। धार्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं।
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राज्यपाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हिमालयी पारिस्थितिकी की सुरक्षा के साथ विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति का संतुलन बना रहे।
अंत में राज्यपाल ने कहा कि सरकार ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के अनुरूप उत्तराखण्ड को भी विकसित और समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने विधानसभा के सभी सदस्यों से अपेक्षा जताई कि वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा करते हुए प्रदेश के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
राज्यपाल के अभिभाषण के साथ ही विधानसभा के बजट सत्र की औपचारिक शुरुआत हो गई, जिसमें आगामी दिनों में विभिन्न विधेयकों और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
सोमवार को ही बजट पेश किया जाएगा। विपक्ष के रुख से साफ लग रहा है कि बजट सत्र में हंगामे के ही आसार बने रहेंगे।
