आम लोगों के लिए खुला उत्तराखंड लोकभवन

तीन दिवसीय बसंतोत्सव का आगाज: इस मौके पर उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि लोकभवन में तीन दिवसीय बसंतोत्सव का आगाज हो गया है. कार्यक्रम के दौरान रंग-बिरंगे अलग-अलग तरह की फूल देखने को मिले हैं. ऐसे में यह कहा जा सकता है कि प्रकृति का फूलों पर एक बड़ा आशीर्वाद है. ये फूल अर्थव्यवस्था बढ़ाने के साथ ही किसानों की आय को बढ़ाने में काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि उत्तराखंड में मौजूद तमाम फूलों और जड़ी बूटियां के जरिए बेहतर परफ्यूम बनाकर पूरे विश्व को दे सकते हैं. तिमरू से तैयार किया गया परफ्यूम आज विश्व भर में फेमस हो गया है.

भोज पत्र का पोस्टल कवर भी जारी किया गया: हॉर्टिकल्चर और एग्रीकल्चर विभाग ने फूल से स्वास्थ्य पर कितना बेहतर असर इसको लेकर तमाम अध्ययन भी किए हैं. इसके साथ ही भोज पत्र का आज पोस्टल कवर भी जारी किया गया है. भोज पत्र प्राचीन समय में कम्युनिकेशन का एक बड़ा माध्यम था, जिसे आज पूरी दुनिया के साथ साझा करने का काम भारतीय पोस्ट ऑफिस ने किया है.

इसके साथ ही महिला सहायता समूह की ओर से तैयार किए गए स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी भी यहां पर लगाई गई है, जिसको टेक्नोलॉजी पर भी जोड़ दिया गया है. इसके तहत वसंतोत्सव कार्यक्रम में आने वाले लोग क्यूआर कोड को स्कैन करके अपना फीडबैक भी दे सकते हैं.

2000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाया जाता भोजपत्र का पेड़: ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए उद्यान विभाग के डिप्टी डायरेक्टर नरेंद्र यादव ने कहा कि भोज पत्र का पेड़ 2000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाया जाता है. भोज पत्र का इस्तेमाल प्राचीन समय से ही कम्युनिकेशन का एक बेहतर जरिया रहा है और वेदों को लिखने में भी इन्हीं भोजपत्र का इस्तेमाल किया गया है, यानी ये एक नेचुरल पेपर है. यही वजह है कि इस बसंतोत्सव कार्यक्रम के दौरान भोजपत्र को थीम के रूप में शामिल किया गया है, ताकि लोगों को इसके बारे में जानकारी उपलब्ध कराई जा सके. इसके साथ ही इसका संरक्षण और संगठन किया जा सके.

भोजपत्र के पेड़ विलुप्त के कगार पर नहीं है, लेकिन इसके संरक्षण और संवर्धन की जरूरत है. प्राचीन समय में भोजपत्र का इस्तेमाल किया जाता था. हालांकि आज इसकी इस्तेमाल नहीं किया जाता है. इसीलिए अब काफी लोगों को भोजपत्र की जानकारी नहीं है. यही वजह है कि उद्यान विभाग की ओर से भोजपत्र पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि इसके संरक्षण के साथ ही आने वाली पीढ़ियों को भोजपत्र की जानकारी मिल सके.
– नरेंद्र यादव, डिप्टी डायरेक्टर, उद्यान विभाग –

यही वजह है कि पोस्टल विभाग की ओर से एक डाक टिकट भी जारी किया गया है. ताकि साल भर ये देश भर में सरकुलेशन में रहे. इस साल की थीम फ्लोरल हीलिंग रखी गई है. यानी पुष्प में वो तमाम विशेषताएं मौजूद हैं, जिससे तमाम बीमारियों को ठीक किया जा सकता है. लिहाजा केमिकल दवाओं के बजाय फूलों का इस्तेमाल कर अपनी इम्यूनिटी को बढ़ा सकते हैं.